November 24, 2020

नई पौध को संस्कारों और संस्कृति से जोड़ें : स्वामी रामदास ब्रम्हचारी

Spread the love

इन्दौर । संसार के भौतिक संसाधनों की आपाधापी में मनुष्य भटक रहा है। परिवार बिखर रहे हैं, रिश्तों में दरारें आ रही हैं। इसका मुख्य कारण यही है कि हम संस्कारों और संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। हमारी नई पौध को अब शिक्षा के साथ संस्कारों की भी जरूरत है जो भागवत, रामायण और गीता जैसे दिव्य ग्रंथों से ही प्राप्त हो सकते है। रामायण जीवन की और भागवत मोक्ष की कथा है।
माता केशरबाई पारमार्थिक न्यास के तत्वावधान में अंग्रेजी नए वर्ष के उपलक्ष्य में बर्फानीधाम के पीछे गणेश नगर स्थित केशरबाई धर्मशाला परिसर पर चल रहे श्रीमद भागवत ज्ञान यज्ञ में आज झांसी के नीलकंठ पीठाधीश्वर स्वामी रामदास ब्रम्हचारी ने उक्त दिव्य विचार व्यक्त किए। प्रारंभ में आयोजन समिति की ओर से संयोजक तुलसीराम रघुवंशी, सिद्धार्थ सिंह सिसोदिया, रेवत सिंह रघुवंशी, डब्बू अग्रवाल, रोहित द्विवेदी, पृथ्वीराज कुमावत आदि ने वेदिक मंत्रोच्चार के बीच व्यासपीठ का पूजन किया। संयोजक तुलसीराम रघुवंशी ने बताया कि आचार्य पं. रामदास ब्रम्हचारी 7 जनवरी तक प्रतिदिन दोपहर 1 से 5 बजे तक संगीतमय भागवत की अमृत वर्षा करेंगे। शुक्रवार 3 जनवरी शुकदेव द्वारा कथा एवं वराह अवतार प्रसंग की कथा होगी। शनिवार 4 जनवरी को राम एवं कृष्ण जन्म उत्सव मनाएं जाएंगे।
आचार्य पं. ब्रम्हचारी ने परीक्षित जन्म प्रसंग की व्याख्या करते हुए कहा कि कलियुग में भागवत जैसी साक्षात भगवान की वाणी का श्रवण मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। भागवत भारत भूमि का विलक्षण ग्रंथ है, जिसे हजारों बार सुनने के बाद भी भक्ति की प्यास खत्म नहीं होती। रामायण जीवन जीने और भागवत मृत्यु को मोक्ष में बदलने की कथा है। भागवत मृत्यु के भय से व्यक्ति को निर्भय बनाती है। परीक्षित को मौत का भय सता रहा था लेकिन शुकदेव ने भागवत की कथा सुनाकर उनका यह भय दूर कर दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published.