April 12, 2021

निर्भया गैंगरेप: दोषी विनय और मुकेश की क्यूरेटिव पिटिशन पर 14 जनवरी को SC में सुनवाई

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नई दिल्ली. निर्भया गैंगरेप केस में दोषियों को फांसी देने तारीख करीब आ रही है। इस बीच फांसी की सजा पा चुके दो दोषियों विनय शर्मा और मुकेश सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटिशन यानी सुधारात्मक याचिका दाखिल की है। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की तारीख 14 जनवरी तय की है। बता दें कि अदालत ने 22 जनवरी को दोषियों को फांसी पर लटकाने का डेथ वॉरंट जारी किया था।

विनय ने याचिका में दी हैं ये दलीलें

सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच विनय और मुकेश की क्यूरेटिव पिटिशन पर सुनवाई करेगी। इस बेंच में जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस आर भानुमती और जस्टिस अशोक भूषण का नाम शामिल है। निर्भया के गुनहगार विनय ने अपनी क्यूरेटिव पिटिशन में अपनी युवावस्था का हवाला देते हुए कहा है कि कोर्ट ने इस पहलू को त्रुटिवश अस्वीकार कर दिया है। याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितयों, उसके बीमार माता-पिता सहित परिवार के आश्रितों और जेल में उसके अच्छे आचरण और उसमें सुधार की गुंजाइश के बिन्दुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया है और जिसकी वजह से उसके साथ न्याय नहीं हुआ है।

17 मामलों का हवाला देते हुए राहत की मांग

याचिका में यह भी कहा गया है कि इस मामले में शीर्ष अदालत के 2017 के फैसले के बाद इसके 3 जजों की बेंच ने रेप और मर्डर से जुड़े कम से कम 17 मामलों में दोषियों की मौत की सजा उम्र कैद में तब्दील की है। याचिका में इस फैसले को कानून की नजर में गलत बताते हुए कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने बाद के फैसलों में निश्चित ही कानून में बदलाव करके उसके जैसी स्थिति के अनेक दोषियों की मौत की सजा को उम्र कैद में तब्दील किया है।

क्या है निर्भया गैंगरेप केस

दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को ही इस मामले के चारों दोषियों मुकेश, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे तिहाड़ जेल में मौत होने तक फांसी के फंदे पर लटकाने के लिए जरूरी वॉरंट जारी किए थे। दक्षिण दिल्ली में 16 दिसंबर, 2012 की रात चलती बस में 6 व्यक्तियों ने निर्भया के साथ सामूहिक बलात्कार के बाद उसे बुरी तरह जख्मी करके बाहर फेंक दिया था। निर्भया की बाद में 29 दिसंबर, 2012 को सिंगापुर के अस्पताल में मौत हो गई थी। इस केस के मुख्य आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में खुदकुशी कर ली थी जबकि एक नाबालिग दोषी बहुत पहले ही रिहा हो चुका है।

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