July 23, 2021

अब नगरीय निकाय बनेंगे और ताकतवर : अली हुसैन सिद्दीकी

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 दुर्ग । नगरीय निकाय संशोधन विधेयक पर राज्यपाल द्वारा हस्ताक्षर किये जाने पर स्वागत करते हुये समाजिक कार्यकर्ता व कांग्रेसी नेता अली हुसैन सिद्दीकी ने कहां इससे प्रदेश के नगरीय निकाय को ताकत मिलेगी,21 वर्ष के युवाओं के नगरीय निकाय के महापौर और अध्यक्ष पदो पर निर्वाचित होने के भूपेश बघेल सरकार के फैसले से अब युवाओं को नगरीय निकायों में और ज्यादा बेहतर भागीदारी मिलेगी।छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने अपने 15 वर्षों के शासनकाल में लगातार नगरीय निकाय संस्थाओ और नगरीय निकाय संस्थाओं के प्रमुखों को कमजोर बनाने का काम किया है। नये संशोधन विधेयक से नगरीय निकाय और ताकतवर बनेंगे। चुनाव प्रक्रिया में बदलाव क़ानून सम्मत है और इससे किसी लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन नहीं होगा। नगरीय निकायों में विसंगतिपूर्ण स्थिति लगातार सामने आती थी, जो नगरीय निकाय के अध्यक्ष है, महापौर है वे किसी और दल के होते है और पार्षदों में किसी और दल का बहुमत होता था तो सामान्य सभा में बजट पारित कराने में और दिन प्रतिदिन की कार्यो में लगातार विरोधाभास की स्थिति होती थी। हंगामें की स्थिति बनती थी और जनता की सुविधा और अधिकारों को खतरा उत्पन्न होता था। इसे दूर करने के लिये एक समन्वयवादी व्यवस्था बनाने के लिये और एक तर्कसंगत व्यवस्था बनाने के लिये संशोधन कि यदि पार्षद अपने मुखिया को चुनेंगे तो इससे नगरीय निकायों की व्यवस्था बेहतर होगी। यही व्यवस्था हमारे देश की संविधान में है। हमारे लोकतंत्र में है। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का चयन भी इसी व्यवस्था के तहत होता है और इसी व्यवस्था को लागू करना गलत बताकर भाजपा ने अपना संविधान विरोधी चरित्र उजागर किया है।
अली हुसैन सिद्दीकी ने नये नगरीय निकाय संशोधन अध्यादेश पर राज्यपाल के हस्ताक्षर होने का स्वागत करते हुए कहां की भाजपा की सरकार में नगरीय निकाय के अध्यक्षों के साइनिंग पावर वापस ले लिए गए थे जिनकी बहाली कांग्रेस की सरकार ने की है। नगरीय निकाय अध्यक्षों के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों में कटौती की गई थी और डीएमएफ जैसा फंड भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पूरी तरीके से प्रशासनिक अधिकारियों को सौंप दिया था जबकि कांग्रेस सरकार बनने के बाद में प्रभारी मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने का काम किया गया है।
 लोकतंत्र में सुधार की गुंजाईश हमेशा रहती है। यदि निर्वाचन प्रक्रिया में कोई बदलाव हो रहा है तो कानून सम्मत है। इससे किसी की लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन नहीं होता। शहरों में कांग्रेस को जबर्दस्त समर्थन प्राप्त है। जिस तरीके से गुमास्ता नवीनीकरण से छूट मिली है। छोटे प्लाटो की रजिस्ट्री को छूट दी गयी है।बढ़े हुए संपत्तिकर को कम किया गया है।पट्टे का नवीनीकरण किया गया है। नये पट्टे दिये जारहे है।बिजली बिल आधा किया गया है। सभी लोगो का राशनकार्ड बनाया गया है। इन सभी कार्यो से नगरीय निकायों में कांग्रेस को जबर्दस्त समर्थन प्राप्त है। विधानसभा चुनाव में भी भिलाई, रायुपर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, अंबिकापुर, जगदलपुर सारे नगरीय निकायों के क्षेत्रों में विधायक जीत कर आये है। नगरीय निकायों के चुनाव में कांग्रेस को ही सफलता मिलेगी। पिछले नगरीय निकायों में भी भारतीय जनता पार्टी ने कोर्ट जाकर चुनाव रूकवाने की भरपूर कोशिश की थी। क्योंकि भाजपा चुनाव में अपने हार की संभावना से भयभीत थी। कांग्रेस ने देश के जाने माने वकीलों को खड़ा करके सर्वोच्च न्यायालय से भाजपा के आदेश पर स्टे केवीएट किया था। इस बार भी कांग्रेस कानूनी लड़ाई के लिये भी तैयार है और चुनावी मैदान में कांग्रेस नगरीय निकाय चुनाव में लड़ाई लड़कर जीत हासिल करने के लिए भी तैयार है।भाजपा को लोकतंत्र की इतनी ही चिंता होती तो नगरीय निकाय के अध्यक्षों और महापौरों के साइनिंग पावर भारतीय जनता पार्टी ने नहीं छिनी होती। भारतीय जनता पार्टी को लोकतंत्र की इतनी ही चिंता होती तो नगरीय निकायों के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों में  कटौती नहीं की होती। भारतीय जनता पार्टी ने डीएमएफ पूरी तरीके से प्रशासनिक अधिकारियों को सौप दिया था। कांग्रेस की सरकार बनने के बाद लोकतंत्र बहाल हुआ है। आज जनप्रतिनिधि इसमें भागीदारी है। इस बात को भारतीय जनता पार्टी को नहीं भूलना चाहिये। पूरे देश में प्रधानमंत्री और प्रदेश में मुख्यमंत्री का चयन इसी प्रणाली से तो होता है जिसमें नगरीय निकाय के चुनाव होने जा रहे है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा इसे लोकतंत्र को खतरा बताना ही इस बात को स्पष्ट करता है कि भाजपा का देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास ही नही है, भाजपा को आज लोकतंत्र में खतरा नजर आ रहा है खरीद-फरोख्त की संभावनाएं नजर आ रही हैं जबकि अब एक साधारण कार्यकर्ता भी पार्षद चुनाव जीतकर अपनी पार्टी के आशीर्वाद से महापौर भी बन सकता है,दरअसल भाजपा में हार के डर से कोई पार्षद पद का उम्मीदवार बनने को तैयार ही नहीं हो रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार की जनहितकारी कार्यों के कारण पूरे प्रदेश में कांग्रेस के पक्ष में वातावरण बना हुवा है।