May 7, 2021

भैरव बाबा जयंती पर आयोजन कल

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दुर्ग। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्री सत्तीचौरा माँ दुर्गा मंदिरए गंजपाराए दुर्ग में भैरव अष्टमी के अवसर पर श्री काल भैरव जयंती बड़े धूमधाम से मनाई जा रही है। श्री काल भैरव जयंती के अवसर पर 19 नवम्बर को श्री सत्तीचौरा मां दुर्गा मंदिर, गंजपारा दुर्ग में विशेष आयोजन किया जा रहा है। समिति के बंटी शर्मा ने बताया कि 19 नवंबर मंगलवार, तिथि अष्टमी पर प्रात: 9 बजे मन्दिर में स्थापित श्री भैरव जी की सिद्धपीठ प्रतिमा का अभिषेक, पूजन, हवन एवं आरती की जावेगी, संध्या 7.30 बजे 108 पूजा थाल से भैरव बाबा जी की महाआरती कर प्रसाद वितरण किया जावेगा।
माँ दुर्गा मंदिर के मुख्य पुजारी सुनील पांडेय बताया कि कालभैरव दो शब्दों से मिलकर बना है। काल और भैरव। काल का अर्थ मृत्यु, डर और अंत। भैरव का मतलब है भय को हरने वाला यानी जिसने भय पर जीत हासिल किया हो। काल भैरव की पूजा करने से मृत्यु का भय दूर होता है और कष्टों से मुक्ति मिलती है। कालभैरव भगवान शिव का रौद्र रूप है। काल भैरव की पूजा से रोगों और दुखों से निजात मिल जाता है।
कालभैरव अष्टमी 19 नवंबर मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालभैरव अष्टमी के रूप में मनाई जाती है। 19 नवंबर को कालभैरव अष्टमी है। इन्हें बीमारी, भय, संकट और दुख को हरने वाले स्वामी माने जाते हैं। इनकी पूजा से हर तरह की मानसिक और शारीरिक परेशानियां दूर हो जाती हैं।
पंडित सुनील पांडेय ने कालभैरव की जन्म कथा के विषय मे बताया कि शिव के भैरव रूप में प्रकट होने की अद्भुत घटना है, कि एक बार सुमेरु पर्वत पर देवताओं ने ब्रह्मा जी से प्रश्न किया कि परमपिता इस चराचर जगत में अविनाशी तत्व कौन है जिनका आदि.अंत किसी को भी पता न हो ऐसे देव के बारे में बताने का हमें कष्ट करें। इस पर ब्रह्माजी ने कहा कि इस जगत में अविनाशी तत्व तो केवल मैं ही हूँ क्योंकि यह सृष्टि मेरे द्वारा ही सृजित हुई है। मेरे बिना संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती। जब देवताओं ने यही प्रश्न विष्णुजी से किया तो उन्होंने कहा कि मैं इस चराचर जगत का भरण.पोषण करता हूँएअत: अविनाशी तत्व तो मैं ही हूँ। इसे सत्यता की कसौटी पर परखने के लिए चारों वेदों को बुलाया गया।

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