December 5, 2020

निगम राजनीति के चर्चित चेहरे टिकट दिला सकते हैं वह नहीं

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बिलासपुर। शहरी राजनीति में एक समय जिन की तूती बोलती थी वे इस चुनाव में अपनी पहचान के लिए जूझ रहे हैं। इसमें कांग्रेस, भाजपा के साथ छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जे के भी कुछ नाम है।एक समय पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल के बचाव में बड़ा बड़ा बयान देने वाले मनीष अग्रवाल अपने राजनैतिक अस्तित्व के संकट से गुजर रहे हैं। टीम अमर के दो प्रख्यात चेहरे कोमावत और गुलशन में से कोमावत को सिंहासन मिल ही गया किंतु गुलशन कहीं आवाज होता नजर नहीं आ रहा इसी तरह भंडारी और दुबे जो निगम में इठलाते घूमते थे आज यदा.कदा ही नजर आते हैं। महिला नेत्रीओं में श्रीवास्तव, दीक्षित शर्मा अब दिखाई नहीं देते यही हाल कांग्रेस का भी है। अजीत जोगी के मुख्यमंत्री कार्यकाल में पंकज सिंह एल्डरमैन बन गए थे। वर्तमान मैं वे टी एस सिंह देव के खास हैं ऐसा माना जाता है कि पार्षदों की टिकट चयन प्रक्रिया में उनकी खूब सुनी गई पर प्रचार में ऐसा दिखाई नहीं देता कुछ लोगों का तो यहां तक कहना है कि टिकट दिलाना और वोट दिलाने में जमीन आसमान का अंतर है। कांग्रेस में निगम राजनीति में जिन लोगों को धुरंधर माना जाता है उसमें छोटे, शहजादी, राजेश शुक्ला, रामचरण यादव जैसे नाम है। इस चुनाव में शहजादी अपने ही सजातीय बंधुओं के चक्कर में टिकट गवा बैठी जो टीम वार्ड का परिसीमन कर रही थी उसका एक विकेट गिर गया जिसका खामियाजा एक वार्ड हार के भी चुकाना पड़ सकता है। भाजपा-कांग्रेस के निर्दलीय प्रत्याशी यदि आधा दर्जन को पार कर गये तो महापौर पद पर लड़ाई देखने लायक होगी महापौर का सीधा चुनाव ना होने का प्रत्यक्ष प्रभाव निगम चुनाव के प्रचार में नजर आ रहा है। प्रचार में जो ठंडापन है। उसका एक बड़ा कारण महापौर का गायब होना है महापौर के लिए सीधा मतदान नहीं होगा तो स्थानीय निकाय चुनाव में प्रचार करने कोई स्टार प्रचारक भी नहीं आएगा।