May 13, 2021

चने की फसल में कीट रोकथाम के बताए उपाय

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कीट प्रकोप: कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक दे रहे फसल को बचाने की सलाह
मुंगेली।
बदलते मौसम तथा अधिक वर्षा से जमीन एवं वातावरण में आद्र्रता बनी रहने के कारण एवं तापमान में परिवर्तन होने से चना फसल में फली छेदक कीट का प्रकोप दिखाई देने लगा है। कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ आर एल शर्मा ने चने के खेतो का निरिक्षण कर बताया कि इस कीट की हरे रंग की इल्ली 1.25 इंच लंबी होती है, जो बाद में भूरे रंग की हो जाती है। यह शुरू में चने के कोमल पत्तियों को खाती है, फली में घुसकर दाना खाती है तथा दाने को खोखला कर देती है। उन्होने बताया कि इस कीट पर नियंत्रण के लिए प्रारंभिक अवस्था में बेसिलस थूरीनजेन्सिस बीटी 750 मिली अथवा एनपीवी 250 एलई एक लीटर प्रति हेक्टेयर तथा फूल आने से पहले अथवा फली बनने के बाद इमामेक्टीन बेंजोएट 5 प्रतिशत एसण्जीण् 80 ग्राम प्रति एकड़ की दर से स्प्रे करने या क्यूनालफॉस 25 ईण्सीण् 1.0 लीटर या प्रोफेनोफास 50 ईण्सी 1.5 लीटर का प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी है। वही पक्षी आश्रय के लिए टी आकार की 40-50 खपच्चियॉ प्रति हेक्टेयर लगाने की सलाह दी है। इसी तरह चने का कटुआ कीट मिट्टी में पाए जाने वाला कीट है। यह पौधो को जमीन के पास काट देता है। यह स्लेटी रंग का होता हैए हाथ से छूने पर गोल कुॅडली बना लेता है। इसके नियंत्रण के लिए प्रभावित क्षेत्रो में कट वर्म के प्रकोप से बचाव के लिए क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण का 25 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से आखिरी जुताई के समय खेत में मिलाने की सलाह दी है।
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