December 2, 2020

कोर्ट कि तानाशाही तहसीलदार ने दिखाई रोड़ पर राजपत्रित अधिकारी को थाने में बनवाया बंधक

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बिलासपुर/सकरी. जंगल का अपना कानून और आमतौर पर फारेस्ट के कर्मचारी तथा अधिकारियो का अन्य सरकारी कार्यालयों से विशेष संपर्क नही होता यहाँ तक कि जंगल के अन्दर सड़क स्टॉप डेम लकड़ी कटाई अवैध शिकार पट्टा नवीनीकरण जैसे मसलो में भी उन्हें क्षेत्र अधिकार प्राप्त है और आईपीसी कि कुछ धाराओ में तो एफआईआर करने से लेकर चलान प्रस्तुत करने तक कि कार्यवाही जंगल विभाग के अधिकारी ही करते है रेंजर जो कि कभी कभी 10 वि और 12 वि पास ही है वह भी राजपत्रित अधिकारी हो जाता है दो दिन पुर्व कानन पेंडारी मिनी जू के भीतर जिले के बाहर के एसडीएम स्त्रीहट के चक्कर में अपनी नौकरी दाव पर लगा बैठे है राज्य में एसडीएम कलेक्टर से बड़े अधिकारी नजर आते है कलेक्टर के शासकीय वाहन में यह उल्लेख रहता है कि जिला कौनसा है किन्तु एसडीएम के वाहन में उसके क्षेत्र का उल्लेख कभी नही होता ऐसा लगता है कि वह डीएम के उपर सुपर डीएम है और यही भावना कवर्धा के एसडीएम के भीतर भारी पड़ी है उनके इस अहेंकार को शांत करने के स्थान पर सकरी तहसीलदार अभिषेक राठौर ने और भड़काया बिना मामले कि तह तक गए उन्होंने अपने ही क्षेत्र के एसडीओ फारेस्ट को एक ऐसे अपराध में थाने में बैठाला जिस पर संज्ञान लेने का उन्हें अधिकार ही नही है आरआई पटवारी एसडीएम के घर के चाकर है और साहब से ज्यादा मेमसाहब कि चाकरी करते है अतः मेमसाहब को थोडा भी कष्ट हो यह उन्हें गले नही उतरता तभी तो एसडीओ फारेस्ट के साथ राजस्व विभाग के अधिकारियो ने इतना घटिया व्यवहार किया.सकरी तहसील में भूमाफियाओ कि शह पाकर अभिषेक राठौर का व्यवहार आम नागरिको के साथ बेहद निंदनीय है वे अपने कोर्ट रूम में भी आम सिकायत कर्ताओ को भी डांटते डपटते देखा जा सकता है रुपया लेने या रुपया लेकर काम करने के लिए यह अधिकारी कुख्यात हो चुका है पैसा लेने के लिए किसी कि नौकरी तक दाव पर लगाने का षडयंत्र इसी कार्यालय में हुआ जब चतुर्थ श्रेणी कि एक महिला कर्मचारी को एसीबी का शिकार बनाया गया पटवारी आरआई के साथ मिलकर अवैध प्लाटिंग के धंधे को शह देने का आरोप अभिषेक राठौर पर आम है अब तो आरोप एक कदम आगे जाकर यह लगता है कि तहसीलदार राठौर के पार्टनरशिप में अवैध कलोनाइजिन्ग का धंधा सिर चढ़कर चल रहा है दो किशान तहसीलदार कि बेजा कार्यवाही से त्रस्त है जिनमे से एक जंगल विभाग का एक सेवा निर्वित्त रेंजर जिसकी खेती कि जमीन में जाने का रास्ता आसमा सिटी के प्रोप्राइटर ने बंद कर दिया है था जमीन को औने पौने में बेचने का दबाव बनाता है नियम रेंजर के पक्ष में है किन्तु धनबल बाहुबल आसमा के साथ है और साथ में है राठौर इसी तरह रामा वैली कालोनी का निस्तार पानी एक कृषक के खेतो को बर्बाद कर रहा है और कृषक ने क़ानूनी आधार पर राठौर कि कोर्ट में वाद प्रस्तुत किया तथा पानी को रोकने का अनुतोष माँगा जो कि जायज है किन्तु 2 साल से तहसीलदार महोदय पेशी दर पेशी दे रहे है और अस्थाई निषेधाज्ञा भी जारी नही करते जिस करण कृषक का लगातार नुकशान होता है आम जनता ऐसा मानकर चलती है कि अधिकारी कि भुजाएँ केवल पूंजीपति के पक्ष में ही फड़कती है आम आदमी का हक़ उनके लिए कोई मायने नही रखता अभी कुछ ही दिन पुर्व इसी तहसीलदार कि एक सिकायत 11 दिसम्बर को संभागीय आयुक्त से भी कि गई है जिसमे आरोप है कि तहसीलदार ने पद का दुरूपयोग करते हुए अपने रिश्तेदार को लाभ पहुँचाया जिसे लाभ मिला उसका नाम संतोष तथा मनोज राठौर है इन दोनों ने मिली भगत कर ख.क्र.505/10 जोकि संजय साहू के नाम पर है के निर्माण पर स्थगन करा दिया संजय साहू कि जमीन का दो बार सीमांकन हो चुका है तथा उसमे कोई त्रुटी नही है किन्तु संतोष तथा मनोज राठौर संजय साहू पर यह दबाव बनाते है कि वह 40 फिट जमीन छोड़ दे दोनों ने बेजा तरीके से जमीन पाने कि नियत रखकर एक प्रकरण तहसील कोर्ट में सुरु कर दिया और तहसीलदार ने अपने रिश्तेदारी निभाते हुए पक्षपातपूर्ण स्थगन भी जारी कार दिया तथा उसी कोर्ट में एक महिने और 15 दिन के पुर्व पेशी नही आती इस प्रकरण में हर दो दिन में पेशी दी जाती है ऐसे एक दो नही कई प्रकरण है जहाँ तहसीलदार अपनी तानाशाही चलाते दीखते है और ऐसी ही तानाशाही उन्होंने एसडीएम कवर्धा को खुश करने के लिए एसडीओ फारेस्ट को दिखाई फारेस्ट का पूरा अमला अपने अधिकारी के साथ है और कलेक्टर पर यह दबाव है कि वे निष्पक्ष कार्यवाही करे जबकि इसके पुर्व जब भी इस तहसीलदार कि सिकायते हुई उन्होंने राठौर कि गलतियों को अनदेखा ही किया है (फोटो तहसीलदार अभिषेक राठौर )

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