November 24, 2020

आदर्श व्यक्तित्व का युवा ही राष्ट्र निर्माण कर सकता है – दीया छत्तीसगढ़

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अखिल विश्व गायत्री परिवार की युवा शाखा दिव्य भारत युवा संघ ने 20 जनवरी से 25 जनवरी तक ओड़िशा के बालेश्वर एवं जाजपुर के 15 से अधिक शिक्षण संस्थानों पर डिवाइन वर्कशॉप आयोजित कर 3000 से अधिक युवाओं को अपने व्यक्तित्व को परिष्कृत करते हुए राष्ट्रनिर्माण में अपनी सफल भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया । जिला शासकीय हाई स्कूल जाजपुर, गुरुकुल कलिंगा रेसिडेंसियल कॉलेज जाजपुर, बिद्वान रेसिडेंसियल साइंस कॉलेज जाजपुर, सेंचुरियन यूनिवर्सिटी गोपालपुर, बालेश्वर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, गोपालपुर डिग्री कॉलेज, जगन्नाथ साइंस कॉलेज, वीनस ग्रुप ऑफ इंजीनियरिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट सहित विभिन्न स्कूलों में वर्कशॉप आयोजित कर मुख्य प्रवक्ता दीया छत्तीसगढ़ से डॉ योगेंद्र कुमार एवं इंजीनियर युगल किशोर साहू ने युवाओं को मातृभूमि के लिए अपनी प्रतिभा एवं समय नियोजित करने की प्रेरणा दी। डॉ योगेंद्र कुमार ने मानवीय उत्कर्ष के महत्व को समझाते हुए बताया कि मनुष्य का जीवन अग्नि की तरह होता है जिसमे अगर हम कूड़ा कचरा डालें तो दुर्गन्ध आती है और अगर हवन सामग्री डालें तो सर्वत्र सुगंध फैलता है, अगर हमे अपने जीवन को निरंतर उत्कर्षता की ओर ले जाना है तो उपासना, साधना और आराधना को जीवन का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने युवाओं को वैज्ञानिक अध्यात्मवाद की बारीकियों को बड़े ही सवेंदनशील एवं भावनात्मक तरीके से समझाया। इंजीनियर युगल किशोर ने युवाओं को इस भागदौड़ एवं चकाचौंध से भरी जिंदगी में भीड़ का हिस्सा ना बनते हुए अपनी एक नई पहचान और आदर्श व्यक्तित्व बनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने युवाओं को बताया कि भारत मे 67 प्रतिशत जनसंख्या युवा है, लेकिन आज का युवा अपनी जिंदगी में ही इतना व्यस्त है कि प्रकृति, समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपनी भूमिका नही निभा रहा है। युवा प्रतिदिन 10 मिनट की आत्म समीक्षा, भगवान के प्रति अगाध श्रद्धा एवं अपने अहंकार को गलाकर अपने व्यक्तित्व को श्रेष्ठ बना सकता है। इस पांच दिवसीय युवा जागृति अभियान के सफलता पूर्वक आयोजन में दीया ओड़िशा से राजेश कुमार पांडा, ज्योतिर्मय दास, मदन मोहन राउत, रघुनाथ ढाल, पिताबाश दास, संतोष कुमार जेना एवं रेवती बाला पंडा ने विशेष योगदान दिया। कार्यक्रम की प्रेरणास्त्रोत दीया ओड़िशा की सुश्री कुमुदनी मुदुली एवं सुश्री तिलोत्तमा मुदुली रही।

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