December 2, 2020

एक ही जीवन में दो स्तरों पर जीने को विवश हैं नारियां

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बिलासपुर । पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय में महिला ससक्तिकरण विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।
पहले दिन स्वामी निखिलेश्वरानन्द ने अपने उद्बोधन में कहा एक तरफ पुरुष और दूसरी तरफ महिलाएं हैं और दोनों के बीच हम जैसे संन्यासी लोग है, आप लोग कह सकते हैं कि मैंने इस विषय पर आने की सहमति कैसे दी? इसका जवाब मैं स्वामी विवेकानंद द्वारा किए गए महिला उत्थान कार्य को बताते हुए देते चलता हूं। स्वामी विवेकानंद ने 1898 में बालिका शिक्षा और महिला शिक्षा के लिए कार्य करने के उद्देश्य से बहन निवेदिता भारत आने को कहा। बहन निवेदिता पाश्चात्य संस्कारों में पली-बड़ीं एक ऐसी नारी थीं जिन्होंने न केवल भारतीय संस्कारों को आत्मसात किया बल्कि उन्होंने भारतीय नारी शिक्षा और उनके उत्थान के लिए पूरा जीवन यही रहकर कार्य किया। उन्हें भारतीय संस्कृति इतनी अच्छी लगी कि वे यहीं रह गईं।
आज नारियों के सामने एक ही जीवन में दो स्तरों पर जीने को कहा जाता है- पहला हमारा वह शिक्षित युवा जो अपने विवाह के पूर्व पाश्चात्य संस्कारों को ओढ़े वह युवती पसंद करता है जो शिक्षित तो, आर्थिक रूप से मजबूत, स्वतंत्र हो, कुछ हद तक स्वच्छंद भी हो, नये विचार रखती हो, इत्यादि। लेकिन वहीं पुरुष जब विवाह के लिए किसी युवती को पसंद करता है तो वह चाहता है उसे ऐसी जीवन साथी मिले जो संस्कारित और सुशील हो।
महिला पूर्ण है और पुरुष अपूर्ण- कुलपति प्रो. बंशगोपाल सिंह
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे विवि के कुलपति प्रो. बंशगोपाल सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा प्रकृति महिला और पुरुष की रचना की है। संरचना के आधार पर देखें तो दोनों में भेद है। महिला पूर्ण है और पुरुष अपूर्ण। इसलिए पुरुष अपने को पूर्ण बनाने के लिए लगातार कोशिश करता रहता है परिणाम यह होता है कि वह जीवन के विभिन्न अनुभव प्राप्त करता हुआ आगे बढ़ता जाता है, इसमें समाज का भी बहुत बड़ा हाथ होता है। जैसे समाज में यह कहा जाता है कि वंश पुरुष से चलता है।
सफल होना है तो सफल होने की चाहत होनी चाहिए- डॉ. अरुणा पल्टा कुलपति दुर्ग विवि
विशिष्ट अतिथि डॉ. अरुणा पल्टा कुलपति दुर्ग विवि ने कहा महिलाओं केवल समानता चाहिए इसके अतिरिक्त और कुछ नहीं। उन्होंने कहा मुझे बड़ा आश्चर्य होता है कि इसके लिए केवल पुरुषों को जिम्मेदार ठहराया जाता है। मेरे ख्याल से महिलाओं में ही विजन की कमी है इसके लिए पुरुषों पर आरोप लगाना गलत है। हम महिलाओं को यह सोचना चाहिए कि यदि हमें सफल होना है तो सफल होने की चाहत होनी चाहिए, स्वयं में सफल होने की चाहत रखें तभी सफल होंगे। मुझे यह कहते हुए गर्व होता है आज पूरे विश्व में ऐसे विदुषी महिलाएँ हैं और हुईं हैं जिन्होंने न केवल अपने परिवार को सम्मान दिया बल्कि अपने समाज को भी गौरवान्वित किया है।
लड़कियों में शिक्षा जरूरी है- डॉ. रश्मि शर्मा
विशिष्ट अतिथि डॉ. रश्मि शर्मा महिला चिकित्सक अपोलो ने कहा लड़कियों में शिक्षा जरूरी है। वे इसी के बल पर आर्थिक और सामाजिक स्तर पर मजबूत होंगी। उन्होंने अपने जीवन का अनुभव बताते हुए कहा गाँव की ऐसी लड़कियाँ जिन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गाँव में ही अर्जित की और आगे पढक़र परिवार, समाज और देश का नाम रोशन किया है।

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