November 26, 2020

साहित्य जगत की अमूल्य निधि है मेघदूत की वापसी

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बृजमोहन ने किया हरीश कुमार झा की किताब का विमोचन
भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र और सेल के पूर्व वरिष्ठ उप निदेशक साहित्यकार हरीश कुमार झा की दो किताबों मेघदूत की वापसी और महारानी मंदोदरी का विमोचन समारोह संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश के पूर्व पर्यटन और संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल और विशिष्ठ अतिथि बख्शी सृजन पीठ भिलाई के अध्यक्ष डां. रमेंद्रनाथ मिश्र, पंडित सुंदरलाल शर्मा शोध पीठ के पूर्व अध्यक्ष डां. बालचंद्र कछवाहा, मंदिर कमेटी के ट्रस्टी पुरेंदर मिश्रा व स्मृति संस्थान केअध्यक्ष शिवकुमार झा थे। आचार्य सरयूकांत झा स्मृति शोध संस्थान के तत्वावधान में जगन्नाथ मंदिर के सभागार रायपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में अतिथियों ने लेखक की दोनों साहित्यिक कृतियों को साहित्य जगत की उत्कृष्ट निधि निरुपित किया। मुख्य अतिथि श्री अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि फौलादी संस्कृति में रहने वाले एक इंजीनियर द्वारा समाजोपयोगी उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियां रचित करना बहुत बड़ी बात है। आज जब पूरा विश्व गलोबल वार्मिंग जनित मौसम परिवर्तन की विकट समस्या से चिंतित है,ऐसे विकट दौर में हरीश कुमार द्वारा मेघदूत की वापसी किताब में छग सहित पूरे भारत के बिगड़ते पर्यावरण पर चिंता व समाधान पर ध्यानाकर्षण सराहनीय है। उनकी महारानी मंदोदरी पुस्तक भी धर्म संस्कृति के नव परिष्कार और स्त्री सशक्तिकरण की दृष्टि से प्रेरक है। बालचंद्र कछवाहा ने कहा कि आज प्रदूषण और भोगवादी अपसंस्कृति के अंधकार में डूबे भारत के वर्तमान को अलकापुरी से लौटते मेघ की पीड़ा से जोडऩा हरीश कुमार की मौलिक आलंकरिक काव्य रचना साहित्य व समाज के लिए दिशाबोधक है। पुरंदर मिश्रा ने लेखक की दोनों पुस्तकों को उनकी सामाजिक सरोकार व रचनात्मक सोच का अभिनव उदाहरण बताया। कवि प्रदीप झा, अनीता झा, रश्मि, सुषमा झा, शिक्षिका आरती झा, हेमंत झा, व राकेश ठाकुर और संजीव ठाकुर ने कहा कि जीवनभर लोहा लंगड़ व सीमेंट में काम करने वाले लेखक की पहली किताब छत्तीसगढ़ में गीता व मेघदूत के लहुटती की तरह यह दोनों पुस्तकेंभी उनकी अनूठी कल्पनाशीलता,लीक से हटकर काम करने के साथ आने वाली पीढिय़ों के लिए भी प्रेरक हैं। लेखक हरीश कुमार झा ने मेघदूत की रचना प्रक्रिया के बारे में बताया कि नदियों के प्रदूषण सहित तेजी से बिगड़ते पर्यावरण को अपनी इस कृति में पिरोकर पुरा समृद्धि को वापस लाने का आह्वान किया है। साहित्य सृजन की प्रेरणा उन्हें पिता शिक्षाविद् गोविंदनाथ झा की स्मृति में श्वसुर साहित्यकार पंडित सरयूकांत झा से मिली। पूर्व में दिव्या झा व भारती झा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद अतिथियों ने दोनों किताबों का विमोचन किया। अतिथियों का स्वागत कुलदीप झा, मनीष झा, आनंद मोहन ठाकुर व यश झा ने किया। कार्यक्रम का संचालन सचिव प्रदीप ठाकुर और आभार प्रदर्शन शारदेंदु झा ने किया।

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