April 12, 2021

सामना की संपादकीय में मोदी सरकार पर चुटकी, आम लोगों की अर्थव्यवस्था ही खत्म कर डाली

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मुंबई । शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में शनिवार की संपादकीय में लिखा कि आर्थिक महाबर्बादी पर क्या और कैसे उपाय किए जाएं,इस छोड़कर राजनीतिक पार्टियां दिल्ली हिंसा, सीएए, एनपीआर, मध्यप्रदेश की राजनीति और महाराष्ट्र में नए कारनामे का कोयला जलाकर बैठी हैं। सामना में कोरोना वायरस की वजह से हो रही आर्थिक महाबर्बादी की बात कही गई है। सामना में आने वाले दिनों के आर्थिक संकट के बारे में चेताया गया है। सामना ने लिखा है, हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही डगमगाई थी अब वहां गिरती जा रही है। अर्थव्यवस्था को बल देनेवाला हर घटक या तो कोरोना के डर से दरवाजा बंद कर बैठा है या फिर अतिदक्षता विभाग में मूर्छित पड़ा है। विश्व की अर्थव्यवस्था ‘मास्क’ पहनकर चेहरा छिपाकर बैठी है। इसका प्रभाव सिर्फ अंबानी जैसों को ही नहीं, बल्कि आम लोगों पर पड़ने वाला है।
इसी के साथ मोदी सरकार पर भी चुटकी ली गई है। सामना ने लिखा, हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था नोटबंदी और जीएसटी जैसे हल्के प्रयोगों के कारण कमजोर हो चुकी है। संकट के समय समांतर अर्थव्यवस्था लोगों को जिंदा रखती है। लेकिन मोदी सरकार ने रोग की अपेक्षा इलाज को ही भयंकर बनाकर आम लोगों की अर्थव्यवस्था ही खत्म कर डाली। प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों को विदेशी दौरे पर नहीं जाने का निर्देश दिया है। लेकिन प्रधानमंत्री के अब तक के विदेशी दौरे पर खर्च 750 करोड़ का बकाया एअर इंडिया को नहीं मिल पाया है। अब कोरोना का फटका बैठा है। संपादकीय में जहां शेयर बाजार में निवेशकों के करोड़ों मटियामेट होने की बात कही गई है, वहीं डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट पर भी चिंता जताई गई है। सामना में लिखा गया, शेयर बाजार के लुढ़कने के बाद पहले ये देखा जाता है कि अंबानी-अडानी को कितना नुकसान हुआ। इस बारे में जानकारी ये है कि बाजार लुढ़कते ही अंबानी 1.1 लाख करोड़ से गरीब हो गए। अंबानी जैसों को ऐसा फटका लगना मतलब हमारे उद्योग जगत को बड़ा फटका लगने जैसा है। इसका परिणाम निवेश और रोजगार आदि पर हो सकता है। सामना की संपादकीय में लिखा है, इन झटकों से उद्योगपतियों के जीवन में कुछ फर्क नहीं पड़ेगा। उनकी घोड़ागाड़ी और हवाई जहाज उड़ते रहने वाले हैं, लेकिन गरीबों के चूल्हे बुझ जाएंगे।

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