January 18, 2021

बहर तय करती है गज़ल का मेअयार

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दुर्ग। छत्तीसगढ़ उर्दू अकादमी के सहयोग से हल्क-ए-अदब द्वारा गज़ल पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता डा. प्रोफेसर साकेत रंजन प्रवीर थे। अध्यक्षता अध्यक्षता वरिष्ठ रचनाकार गुलबीर सिंह भाटिया ने की। कार्यशाला को संबोधित करते हुए डा. प्रवीर ने नए लिखने वालों को लेखन विधा के टिप्स देते हुए उन्हें छंद शास्त्र की बारीकियों से अवगत कराया। अरबी जबान के लेखक खलील बिन अहमद की पुस्तक इस्तेलाह में गज़ल लिखने के लिए वर्णित छंद शास्त्र (बहर) की उपयोगिता बताई। उन्होंने कहा कि बहर के बिना गज़ल परफेक्ट नहीं हो सकती। नए लिखने वाले महज अंदाज आराई करते हैं जिसे गजÞल नहीं कहा सकता। इस दौरान उन्होंने सालिम, मुरक्कब और जÞहाफ बहर के अलावा गजÞल के लिए उपयोगी रदीफ, काफिया, मिसरा और हर्से रवी के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि बहर ही तय करती है कि गजÞल में कितना दम है।
कार्यशाला के दूसरे चरण में उर्दू शायरी, हिंदी साहित्य सृजन और छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए खुदी, बद्र और बाबा निजाम अवार्ड प्रदान किया गया। इस श्रृंखला में कृष्ण कुमार कशिश को उर्दू शायरी के लिए, विद्या गुप्ता को हिंदी साहित्य सृजन एवं प्रदीप वर्मा को छत्तीसगढ़ भाषा के सम्मानित किया गया। इस सत्र के मुख्य अतिथि हाजी साजिद अली थे। कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने उर्दू अकादमी के सहयोग और हल्क-ए-अदब के प्रयास की सराहना की। समाजसेवी रजा खोखर और रऊफ कुरेशी ने शायरों और कवियों को राष्ट्र निर्माण और एकता का दूत बताया। सरला शर्मा वरिष्ठ साहित्यकार ने सम्मान हासिल करने वालों को बधाई देते हुए हल्क-ए-अदब की कार्यशाला को प्रदेश में साहित्यिक वातावरण बनाने की दिशा में मील का पत्थर निरुपित किया। तृतीय चरण में शाम चार बजे से दुर्ग-भिलाई के अलावा अन्य शहरों से आए कवियों व शायरों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। इनमें रायपुर, भाठापारा, बिलासपुर, बेमेतरा, रायगढ़, जांजगीर, महासमुंद, राजनांदगांव, खैरागढ़, कवर्धा, बालोद, दल्लीराजहरा आदि शहरों के रचनाकार शामिल थे। काव्य संध्या की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर निजाम राही ने की। संचालन हल्क-ए-अदब के सचिव इसराईल बेग शाद ने व आभार प्रदर्शन हाजी हनीफ भिंडसरा अध्यक्ष हल्क-ए-अदब ने किया। शायर मुमताज़, सुखनवर हुसैन, शिरीन खान, शशि महुआ, आलोक नारंग, नवेद रजा, सूर्यकांत गुप्ता, नवीन तिवारी, मोहम्मद हुसैन, अमित तिवारी, राजकुमार चौधरी, शुचि भवि, माला सिंह आदि ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं की वाहवाही लूटी। इस मौके पर हाजी ताहिर कुरैशी, यूनुस पटेल, रज्जब अली, आसिफ इकबाल, प्रदीप पांडे और सलाम कौसर सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी मौजूद थे।
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