November 26, 2020

छग जुझारू आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका कल्याण संघ पार्वती के नेतृत्व में नई इबारत लिख रही

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 पुनः निर्विरोध जिलाध्यक्ष बनी पार्वती
कवर्धा। आंगनबाड़ी कर्मियों के संगठन के इतिहास में जनवरी 2017 से एक नई इबारत लिखी गई, जब जिले में छत्तीसगढ़ जुझारू आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका कल्याण संघ का उदय हुआ। संगठन की प्रांतीय टीम ने जिले की बागडोर श्रीमती पार्वती यादव को सौंपा और उन्होने सभी आंगनबाड़ी बहनों के सहयोग से उनके अधिकार और मांगों के लिए निडर होकर संघर्ष शुरू कर दिया। वे सभी संगठनों को साथ लेने में सफल रही और 49 दिनों तक अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते शासन की चूलें हिल गईं।
पार्वती ने जिले की बागडोर संभालते ही सबसे पहले जनपद कार्यालय कवर्धा के पास 16 जनवरी 17 को एक दिवसीय धरना प्रदर्शन से अपना मंसूबा शासन के समक्ष स्पष्ट कर दिया। इसके बाद वे पीछे मुड़कर नहीं देखी और सुदूर वनांचल तरेगांव जंगल, चिल्फी, रेंगाखार, बोड़ला का प्रवास कर वहां की आंगनबाड़ी बहनों को संगठन से जोड़ने में सफल रही। वहीं दूसरी ओर पंडरिया, कुंडा, कवर्धा, दशरंगपुर, लोहारा परियोजना को भी संगठन से जोड़ने में सफल हुई।
पार्वती ने बताया कि विषम परिस्थितियों में काम करते हुए आंगनबाड़ी बहनों को बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अधिकारियों द्वारा बात बात पर उन्हें अंशकालीन कर्मी कहकर नौकरी से निकाल देने की धमकी दी जाती थी। अल्प मानदेय पर काम करने वाली आंगनबाड़ी बहनों के मन में डर बैठा दिया गया था कि यदि वे अपनी मांगों की पूर्ति के लिए शिक्षा कर्मियों की तरह अनिश्चितकालीन हड़ताल करती हैं, तो शासन द्वारा बर्खास्त कर दी जाएगी। इसी डर से वे लंबे आंदोलन करने से डरती थी। यदि आंदोलन करती भी थी, तो शासन की एक धमकी से अपने काम पर वापस लौट आती थी। ऐसे समय में जनवरी 2017 को आंगनबाड़ी कर्मियों के संगठन के इतिहास में एक नई इबारत लिखी गई और जिले में छत्तीसगढ़ जुझारू आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका कल्याण संघ का उदय हुआ। प्रांतीय टीम ने जिले में संगठन की बागडोर मुझे सौंपा। संगठन की बागडोर संभालते ही मैने सभी आंगनबाड़ी बहनों के सहयोग से संघर्ष शुरू किया और 16 जनवरी 17 को जनपद कार्यालय कवर्धा के पास सबसे पहले एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया।
इसके बाद प्रांतीय नेतृत्व की उपस्थिति में कर्मचारी भवन कवर्धा में जिले भर से बड़ी संख्या में आई आंगनबाड़ी बहनों ने 25 मई 17 को सर्वसम्मति से पार्वती को पूर्ण जिला अध्यक्ष निर्वाचित किया। जिला अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ के सभी आंगनबाड़ी संगठनों का एक संयुक्त मोर्चा बनाकर अपनी मांगों की पूर्ति हेतु अनिश्चितकालीन आंदोलन करने के विचार को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रयास किया। शुरू में 5, 6 संगठन साथ में आए, किंतु दुर्भाग्यवश सभी संगठन एकजुट नहीं हो पाए। फिर जुझारू संघ व बस्तर क्षेत्र के आंगनबाड़ी संघ मिलकर अपनी 6 सूत्रीय मांगों को सामने रखकर 5 मार्च 18 से अनिश्चितकालीन आंदोलन की शुरुआत की, जिसमें कवर्धा जिले की सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं का पूरा सहयोग और साथ मिला। यह अनिश्चितकालीन आंदोलन 22 अप्रैल 18 तक 49 दिन चला। इस बेमियादी हड़ताल के दौरान जिला अध्यक्ष पार्वती के साथ साथ 75 और आंगनबाड़ी बहनों को शासन ने नौकरी से बर्खास्त किया।
सभी बर्खास्त साथियों को न्यायालयीन प्रक्रिया से बहाल कराया
नौकरी से बर्खास्त सभी बहनों को पार्वती यादव ने न्यायालयीन प्रक्रिया से कुशलता पूर्वक बहाल कराया। इस लंबे संघर्ष से आंगनबाड़ी बहनों को शासन द्वारा भले ही विशेष उपलब्धि नहीं मिली। लेकिन छत्तीसगढ़ की सभी आंगनबाड़ी बहनों के मन से शासन द्वारा नौकरी से बर्खास्त होने का भय खत्म हो गया है साथ ही अधिकारियों के प्रति उनके मन में जो अनावश्यक फोबिया था, वह भी दूर हो गया।