November 26, 2020

26 हजार परिवारों तक पहुंचाई गई नि:शुल्क श्रीमद् भगवद् गीता

Spread the love

– सवा लाख परिवारों तक पहुंचाने का लक्ष्य
– मृत्यु का भय दूर करती है गीता- कैलाश मंथन
– आतंकवाद से लडऩे का संदेश देती है गीता- कैलाश मंथन
गुना। प्रत्येक ग्यारस एवं रविवार को गीता स्वाध्याय मंडलों, मंदिरों, धार्मिक केंद्रों के माध्यम से श्रीमद् भगवत गीता की प्रतियां उन परिवारों तक पहुंचाई जा रही हैं जिनके पास गीता नहीं है। गीता का अध्ययन, पठन मृत्यु का भय दूर करता है। आत्मा की अमर सत्ता से साक्षात्कार करता है। जीवन जीने की कला सिखाता है गीता का ज्ञान। उक्त बात हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने कहा कि हजारों वर्ष पुरातन भारतीय संस्कृति भगवान कृष्ण की अमरवाणी गीता के बाज पर ही जीवित है। विदेशी संस्कृति के आघात के बावजूद पूरे विश्व ने गीता के उपदेशों को स्वीकार है। गीता के विचार आतंकवाद का अंत करने की प्रेरणा देते हैं। जिला मुख्यालय गुना श्रीमद् भगवद गीता के महाप्रचार अभियान का अंतराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख केंद्र बन गया है। अंतर्राष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय वैष्णव परिषद के प्रांतीय प्रचार प्रमुख एवं विराट हिन्दू उत्सव समिति, चिंतन मंच के संयोजक कैलाश मंथन के मुताबिक भारतीय धर्म दर्शन संस्कृति के प्रमुख ग्रंथ श्रीमद् भगवत गीता की अमर वाणी का प्रचार एवं सनातन धर्म संस्कृति के आधार उपनिषद संहिता की घर-घर में स्थापना के मकसद से महाप्रचार अभियान पिछले तीन दशक से चलाया जा रहा है। अब तक गीता की 26 हजार नि:शुल्क प्रतियां वितरण की जा चुकी हैं। श्रीमद् भगवद् गीता के 26 वें दौर के तहत नवागत कलेक्टर एस विश्वनाथन को चिंतन मंच प्रमुख कैलाश मंथन एवं कार्यकर्ताओं ने श्रीमद् भगवद् गीता एवं अंतर्राष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय वैष्णव परिषद का कलेण्डर भेंट किया।
चिंतन मंच ने गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग
देश धर्म की रक्षा करना प्रत्येक भारतवासी का धर्म है। पाखंड वाद पर प्रहार एवं भारतमाता के प्रति भक्ति की भावना जाग्रत करना ही वर्तमान का सर्वश्रेष्ठ कर्तव्य है। चिंतन हाउस में आयोजित गीता स्वाध्याय को संबोधित करते हुए विराट हिन्दू उत्सव समिति प्रमुख कैलाश मंथन ने व्यक्त किए। श्री मंथन ने कहा कि गीता हमें मानव जीवन के वास्तविक चरम लक्ष्य की ओर ले जाती है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन रूपी भारत को देश धर्म के लिए मर मिट जाने का सच्चा धर्म उपदेश दिया था। चिंतन हाउस में स्वाध्याय के दौरान श्री मंथन ने कहा कि श्रीमद् भगवद् गीता देश धर्म और भक्ति के प्रति हमारा दायित्व बोध कराती है। शरीर नाशवान है आत्मा अविनाशी फिर भय कैसा। देश के लिए मर मिटना है सच्चा धर्म है। इस अवसर पर चिंतन बैठक में प्रस्ताव पारित करते हुए कहा गया कि भारत सरकार देश के प्रत्येक सैनिक एवं घर-घर तक गीता के राष्ट्रीय ग्रंथ का दर्जा देते हुए स्थापित करवाएं तभी आतंकवाद पर काबू पाया जा सकता है।
वरिष्ठजनों ने कैलाश मंथन को गीता भेंटकर किया सम्मानित
वहीं सीताराम कॉलोनी में हुए साप्ताहिक स्वाध्याय के दौरान गीता वितरण के तहत स्थानीय वरिष्ठजनों ने हिउस प्रमुख श्री मंथन को सर्वप्रथम श्रीमद् भगवद् गीता की प्रति भेंटकर 50 स्वाध्यायियों को भी नि:शुल्क प्रतियां भेंट की गई। श्री मंथन के मुताबिक अब तक गीताजी की 25 हजार प्रतियों का नि:शुल्क वितरण चिंतन मंच के तहत किया जा चुका है। अंचल के धाॢमक केंद्रों, चिंतन हाउस में हुए कार्यक्रमों के दौरान गीता प्रचारक हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने वरिष्ठ नागरिकों, समाजसेवियों, कार्यकर्ताओं एवं श्रद्धालुओं को नि:शुल्क गीता वितरित की। अंतर्राष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय वैष्णव परिषद मप्र के प्रांतीय प्रचार प्रमुख कैलाश मंथन ने कहा कि प्रत्येक दौर में औसतन 1 हजार गीता की प्रतियां वितरित की गई है। वर्ष 1990 के दशक से चल रहे नि:शुल्क गीता वितरण अभियान ने अब विराट स्वरूप ले लिया है।
…//17 मार्च 2020