November 24, 2020

गांधी विचार पदयात्रा…. इस तरह से गांधी जी को याद करें तो अच्छा लगता है

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जैसाकि आमतौर पर होता है गांधी जी की 150 वीं जयंती पर बाइक रैली भी हो सकती थी। हाथों में तख्तियां लिए युवा तेजरफ्तार बाइक में कुछ स्लोगन गाते शहर में निकल पड़ते। इनके बिल्कुल बगल से गुजरते लोग इन्हें निकलते देख शायद नीरज की अमर पंक्तियां कारवां गुजर गया, गुबार देखते रहे, गुनगुना कर अपने रास्ते निकल जाते। इतनी आपाधापी से भरे वक्त में क्या कुछ हो पाता, फिर कैसे युवा पीढ़ी को गांधी जी से जोड़ने की बात हम सोच पाते।

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन ने कंडेल से गांधी चौक रायपुर तक गांधी विचार पदयात्रा निकालने का निर्णय किया। यह पदयात्रा छह दिनों तक कंडेल से रायपुर के बीच अनेक गांवों से गुजरते हुए गांधी चौक, रायपुर तक पहुंचेगी। यह विचार पदयात्रा गांधी जी को सच्ची श्रद्धांजलि तो है ही, गांधी जी के आदर्शों और विचारों के मुताबिक शासन प्रणाली चलाने की दिशा में बड़ा कदम है। कंडेल से उठाया हुआ यह पहला कदम सुराजी गांवों के छत्तीसगढ़ शासन के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। जैसाकि पुरानी चीनी कहावत है कि हजार मील लंबे सफर की शुरूआत एक छोटे से कदम से होती है।

     यह पदयात्रा कई मायने में संकेत है कि सरकार किस प्रकार काम कर रही है। छह दिन तक पूरे समय में गांवों में रहकर ग्रामीणों से सीधे संवाद से शासन को योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की स्थिति की जानकारी मिलेगी। ग्रामीणों को मुख्यमंत्री से सीधे संवाद का अवसर मिल सकेगा। अपनी बातें सीधे सहज रूप से बताने का अवसर भी सरकार को उपलब्ध होगा। यह गांव से निकली यात्रा है जो राजधानी में समाप्त होगी।

     यह यात्रा गांधी जी के संघर्ष को याद करने की दृष्टि से भी खास होगी और उनके विचारों को भी अपनाने की दृष्टि से भी उपयोगी होगी। यह पदयात्रा यह बताएगी कि संघर्ष का रास्ता ड्राइंग रूम से नहीं खुलता, संघर्ष का रास्ता और बदलाव का रास्ता पगडंडियों से खुलता है। यह वर्तमान में भी दांडी यात्रा के अनुभव को महसूस करने का क्षण भी हो सकता है। जब गांधी जी ने दांडी से यात्रा की शुरूआत की तो नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने इसकी तुलना नेपोलियन की एल्बा से पेरिस की यात्रा से की थी। उस समय ब्रिटिशर्स ने इसे काफी हल्के तौर पर लिया था और उस जमाने में स्टेट्समैन ने छापा था कि क्या एक सम्राट को केतली में पानी उबाल कर हराया जा सकता है। फिर स्टेट्समैन ने यह भी छापा कि गांधी महोदय तब तक समुद्री जल को उबाल सकते हैं जब तक उन्हें पूर्ण स्वराज नहीं मिल जाता। यात्रा जब शुरू हुई और जिस तरह लोग जुड़ते गए, वो ऐतिहासिक हो गई । न्यूयार्क टाइम्स ने रोज इसकी रिपोर्टिंग की। मार्टिन लूथर किंग तो इतने अधिक प्रभावित हुए कि भविष्य में उनके मार्च आफ फ्रीडम की आधारशिला भी इसी घटना से तैयार हुई। यह ऐतिहासिक घटना थी और आज बरसों बाद छत्तीसगढ़ में सविनय अवज्ञा आंदोलन की स्मृति में कंडेल से रायपुर तक पदयात्रा भी लोगों को स्मरणीय रहेगी। हम लोगों ने गांधी जी का समय नहीं देखा, इस तरह की कोशिश और पहल से हम उसे अपने लिए मूर्त कर सकते हैं। हम कल्पना कर सकते हैं कि स्वराज को प्राप्त करने का हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का संघर्ष कितना दृढ़ रहा होगा।

         पदयात्रा का शीर्षक विचार पदयात्रा रखा गया है। जब हम गांधी जी को श्रद्धांजलि देते हैं तो उनके प्रति हमारा यह दायित्व होता है कि हम उनके विचारों को अपनाने की कोशिश करें। उनके उद्देश्यों को समझने की कोशिश करें। गांधी जी के विचारों के अनुरूप सुराजी ग्राम बनाने का लक्ष्य लेकर सरकार ने अनेक योजनाएं तैयार की हैं। हमारे गांव स्वावलंबी हो सके, यह महात्मा गांधी का सपना था। धीरे-धीरे यह टूटता गया और आज गांव शहरी तंत्र पर पूरी तरह आश्रित होते जा रहे हैं। गांव पुनः स्वावलंबी हो सके, विकास का ऐसा रास्ता चुने जिससे धरती की संपदा सहज रूप से सुरक्षित रह सके, सुराजी गांव इसी दिशा में किया गया कार्य है। 

       गांधी जी के साथ ही पंडित सुंदर लाल शर्मा भी इस वक्त याद आते हैं। जिन्होंने गांधीवादी तरीकों से छत्तीसगढ़ में सत्याग्रह की शुरूआत की। कंडेल आंदोलन ने केवल छत्तीसगढ़ में ही स्वतंत्रता संग्राम की दिशा तय नहीं की अपितु पूरे देश को संदेश दिया कि किस प्रकार सत्याग्रह से साम्राज्यों को भी झुकाया जा सकता है।

गांधी जी की १५० वीं जयंती पर कंडेल से पदयात्रा निकालने के निर्णय से बेहतर कुछ भी नहीं हो सकता था। उस पुण्यभूमि से अपनी सुराजी यात्रा की शुरूआत करना जो छत्तीसगढ़ में स्वाधीनता संग्राम की प्रयोगशाला रही और जिसकी अंततः परिणति यह रही कि हम आजाद देश में साँस लेते हैं।

दांडी यात्रा और कंडेल सत्याग्रह के पलों के वक्त देश गुलाम जरूर था लेकिन गांधी जी और पंडित सुंदर लाल शर्मा जैसे नायकों ने भारतीयों को मानसिक रूप से आजाद कर दिया था। उस जमाने में लोगों की मनःस्थिति कैसी थी, यह जानना चाहें तो आप भी कंडेल से निकली गांधी विचार पदयात्रा में भाग ले सकते हैं।