November 30, 2020

छत्तीसगढ़ धान का कटोरा नहीं धान की जन्मभूमि- विधानसभा अध्यक्ष डॉ. महंत

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डॉ. चरणदास महंत ने किया कटघोरा में कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र का शुभारंभ
सांसद एवं विधायकों सहित किसान सम्मेलन में भी हुये शामिल
कोरबा।
छत्तीसगढ़ के विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने आज प्रदेश के 25वें कृषि महाविद्यालय का कोरबा जिले के कटघोरा में शुभारंभ किया। सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत की उपस्थिति में कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र के शुभारंभ अवसर पर डॉ. महंत ने कहा कि छत्तीसगढ़ धान का कटोरा नहीं बल्कि धान की जन्मभूमि है। विश्व में धान की लगभग साढ़े बारह हजार किस्में है, जिसमें से हमारे छत्तीसगढ़ में दस हजार से अधिक किस्में पाई जाती है। जिनका जर्मप्लाज्म आज भी इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में उपलब्ध है। विधानसभा अध्यक्ष ने कटघोरा में कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र षुरू होने पर क्षेत्र के किसानों, युवाओं और छात्र-छात्राओं को बधाई और शुभकामनायें दी। उन्होंने खेती को कम लागत में ज्यादा आमदनी का जरिया बनाने के लिये इस महाविद्यालय में षोध और अन्य जरूरी पाठ्यक्रम भी संचालित करने पर जोर दिया। इस अवसर पर क्षेत्र के 810 पात्र हितग्राहियों को नगरीय क्षेत्र में आबादी भूमि पर भू-स्वामी अधिकार पत्र (पट्टा) भी वितरीत किये गये। कार्यक्रम में मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं विधायक कटघोरा पुरूषोत्तम कंवर, विधायक पाली-तानाखार मोहित केरकेट्टा, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रबंध मण्डल के सदस्य एवं पूर्व विधायक बोधराम कंवर, विश्वविद्यालय के प्रबंध मण्डल के सदस्य आनंद मिश्रा, जनपद पंचायत कटघोरा की अध्यक्ष श्रीमती लता कंवर, नगर पालिका परिषद् कटघोरा की अध्यक्ष श्रीमती ललिता डिक्सेना, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. पाटिल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एस. जयवर्धन, अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी संजय अग्रवाल सहित एस.डी.एम. श्रीमती सूर्यकिरण तिवारी, जनप्रतिनिधि श्रीमती उषा तिवारी, राजकिषोर प्रसाद एवं अन्य गणमान्य नागरिक भी शामिल हुये। कार्यक्रम का शुभारंभ राजगीत ”अरपा पैरी के धारÓÓ से हुआ। स्कूली छात्र-छात्राओं ने स्वागत गीत पर मोहक नृत्य प्रस्तुत किया। डॉ. महंत ने फीता काटकर महाविद्यालय का शुभारंभ किया और महाविद्यालय में विद्यार्थियों को दी जाने वाली सुविधाओं का अवलोकन भी किया। कार्यक्रम स्थल पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कृषि विज्ञान केन्द्र, कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, रेशम विभाग सहित विभिन्न विभागों ने शासकीय योजनाओं को प्रदर्षित करने वाले स्टॉल भी लगाये गये। डॉ. महंत ने अतिथियों के साथ इन स्टॉलों का अवलोकन किया और मौके पर मौजूद किसानों से बातचीत भी की। खेती को व्यवसाय से लिंक करने पर ही मिलेगा किसानों को फायदा- डॉ. महंत ने अपने उद्बोधन में कहा कि किसानों को खेती को अब किसी न किसी कृषि आधारित व्यवसाय से लिंक करने पर ही फायदा मिलेगा। उन्होंने बताया कि अब अलसी के पौधे से धागा बनाकर कोसे की तरह कपड़ा बनाया जा सकता है। अलसी की खेती करने वाले किसानों को इसका प्रशिक्षण देकर आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद की जा सकती है। इसी तरह केले से कपड़े बनाने और जैविक खेती करके जैव उत्पादों को बड़े शहरों में अच्छे दामों में बेचकर भी किसान अपनी आमदनी को बढ़ा सकते हैं। डॉ. महंत ने इन सब के लिये उत्पादों की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग व्यवसाय का उचित ज्ञान एवं प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया। जैविक खेती की ओर बड़ा कदम एनजीबीबी कार्यक्रम- डॉ. महंत ने विधायक पुरूषोत्तम कंवर की मांग पर राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने के बारे में भी उपस्थित लोगों को बताया। उन्होंने कहा कि किसानों के पास खेती का ज्ञान एक अनमोल खजाना है और इस खजाने को निरंतर बनाये रखने के लिये युवाओं को भी खेती-किसानी से जोडऩा होगा। डॉ. महंत ने कहा कि राज्य सरकार ने नरवा, गरूआ, घुरवा, बाड़ी कार्यक्रम से जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से ही गांव-गांव में समृद्धि के नये द्वार खुलने वाले हैं। कटघोरा का कृषि विश्वविद्यालय बोधराम कंवर के परिश्रम का नतीजा- डॉ. महंत ने अपने उद्बोधन में कटघोरा के पूर्व विधायक बोधराम कंवर को कोरबा का गांधी बताते हुये कहा कि कटघोरा में कृषि विश्वविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र का षुरू होना बोधराम कंवर की मेहनत और परिश्रम का नतीजा है। उन्होंनें बताया कि कंवर ने बहुत पहले हरदीबाजार में ग्राम्य भारती महाविद्यालय षुरू किया था। शिक्षा की अलख जगाने और क्षेत्र के युवाओं को पढ़ाई-लिखाई से जोडऩे में इस महाविद्यालय का बड़ा योगदान रहा है। महंत ने बताया कि उनके केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री रहते 2014 में सुतर्रा में कृषि विज्ञान केन्द्र षुरू किया गया था और अब कटघोरा में कृषि महाविद्यालय भी खुल गया है। इस महाविद्यालय को डॉ. महंत ने कोरबा सहित प्रदेश के किसानों के विकास और अनुसंधान के जरिये कोयला बाहुल्य इस जिले में परंपरागत खेती-किसानी को आधुनिक तरीके से करने की शूरूआज बताया। अब बालिकाओं को भी कृषि संकाय की पढ़ाई करने मिलेगी- कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं लोकसभा सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत ने भी पूरे कोरबा वासियों को नये कृषि महाविद्यालय की शूरूआज पर अपनी बधाई और षुभकामनायें दी। उन्होंने कटघोरा के इस कृषि कार्यालय को बालिका शिक्षा के लिये नया अवसर बताया और कहा कि अब बालिकायें भी इस महाविद्यालय में कृषि संकाय की पढ़ाई कर सकेंगी। श्रीमती महंत ने कहा कि बालिकायें खेती-किसानी के तरीके पढ़कर कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक बनेंगी तभी सही मायने में खेती का विकास होगा, जिससे किसानों का भला होगा। उन्होंने कहा कि इस महाविद्यालय से यहॉं के युवाओं को एक नई दिशा मिलेगी। खेती-किसानी में नये अवसर मिलेंगे और हम सब मिलकर नवा छत्तीसगढ़ गढ़ेंगे। पूर्व विधायक बोधराम कंवर ने कृषि महाविद्यालय के लिये मांगे पॉंच करोड़ रूपये- क्षेत्र के पूर्व विधायक एवं कृषि विश्वविद्यालय के प्रबंध मण्डल सदस्य बोधराम कंवर ने कटघोरा के कृषि विश्वविद्यालय के लगभग चार साल तक सफल संचालन के लिये डीएमएफ फण्ड से प्रतिवर्ष 5 करोड़ रूपये की मांग की। उन्होंने कहा कि कोरबा में मेडिकल कॉलेज की स्थापना पर लगभग 600 करोड़ रूपये का खर्चा होगा, परन्तु यदि कृषि महाविद्यालय को हर साल में 5 करोड़ रूपये की मामूली राषि डीएमएफ फण्ड से उपलब्ध करा दी जाये तो कृषि महाविद्यालय में सभी व्यवस्थायें पूरी हो जायेंगी और यह महाविद्यालय भी प्रदेश का बारहवें महाविद्यालय के रूप में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् से मान्यता प्राप्त कर सकेगा। बोधराम कंवर ने महाविद्यालय को चलाने के लिये आर्थिक संसाधनों की आवष्यकता पर जोर दिया और उनकी पूर्ति के लिये राज्य षासन से भी आग्रह किया। विधायक पुरूषोत्तम कंवर ने कटघोरा में सर्वसुविधायुक्त स्टेडियम बनाने की मांग की- कार्यक्रम को संबोधित करते हुये विधायक पुरूषोत्तम कंवर ने कहा कि कटघोरा की बरसों पुरानी मांग को राज्य सरकार ने एक बार में ही पूरा कर दिया है। इस महाविद्यालय के षुरू होने से विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ कृषि क्षेत्र में अनुसंधान के अवसर भी मिलेंगे। कम लागत में खेती से ज्यादा कमाई के गुर भी किसान इस महाविद्यालय में सीख सकेंगे। पुरूषोत्तम कंवर ने कटघोरा में सर्वसुविधायुक्त स्टेडियम बनाने की मांग राज्य सरकार से की। कंवर की मांग पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि स्टेडियम निर्माण के लिये मुख्यमंत्री के समक्ष मांग रखी जायेगी और उसकी स्वीकृति के लिये भी प्रयास किया जायेगा। कोयला खदानों के कारण कोरबा के किसानों में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन पर भी इस केन्द्र से होगा षोध- इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रबंध मण्डल के सदस्य आनंद मिश्रा ने इस दौरान कहा कि कटघोरा में महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र से औद्योगिकरण तथा कोयला खदानों के कारण किसानों के जीवन में आये सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन पर गहरा षोध हो सकेगा। इसके नकारात्मक एवं सकारात्मक दोनों पक्ष इस षोध से सामने आयेंगे। नुकसानदायक पक्ष पर सुधार का रास्ता भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि उद्योगों के लगने और खदानों के कारण किसानों की कृषि भूमि खतम हो गई है। स्थानीय सब्जियों की प्रजातियॉं भी विलुप्त होने की कगार पर हैं। मिश्रा ने कहा कि इस कृषि अनुसंधान केन्द्र के षुरू होने से बैगन, मिर्ची, टमाटर जैसी सब्जियों की स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन पर भी काम हो सकेगा। कृषि क्षेत्र में कौशल विकास केन्द्र के रूप में विकसित होगा कटघोरा का कृषि महाविद्यालय- इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. पाटिल ने कटघोरा में षुरू हुये नये कृषि महाविद्यालय को खेती किसानी के लिये किसानों और युवाओं के कौशल विकास केन्द्र के रूप में विकसित करने की बात कही। डॉ. पाटिल ने कहा कि राज्य सरकार, स्थानीय प्रषासन और बोधराम कंवर की मदद से षुरू हुआ यह कॉलेज कृषि संकाय की पढ़ाई के साथ-साथ आने वाले समय में किसानों को खेती के नये-नये तरीके सीखाने के केन्द्र के रूप में भी जाना जायेगा। डॉ. पाटिल ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. महंत के केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री रहते हुये प्रदेश में धमतरी, कोरिया और कोरबा में कृषि विज्ञान केन्द्र षुरू किये गये थे और आज यह महाविद्यालय षुरू हो रहा है। कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय ने इस वर्ष प्रदेश में आठ नये कृषि महाविद्यालय षुरू किये हैं। कटघोरा का यह महाविद्यालय इन सभी नये महाविद्यालयों में आधारभूत संरचना एवं संसाधन के मामले में सबसे बेहतर है। डॉ. पाटिल ने कहा कि इस महाविद्यालय से खेती-किसानी से जुड़े लोगों और युवाओं को कृषि उत्पादों का व्यवसाय करने की पढ़ाई भी कराई जायेगी। उन्होंने खेती में उन्नत तरीकों के उपयोग और किसानों की आमदनी बढ़ाने में इस महाविद्यालय की सकारात्मक भूमिका का भी आष्वासन उपस्थित लोागों को दिया।
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