July 24, 2021

लोकसभा में सामाजिक सुरक्षा संहिता पेश

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नई दिल्ली। विपक्षी दलों के विरोध के बीच लोकसभा में बुधवार को सामाजिक सुरक्षा संहिता 2019 और उससे संबंधित विधेयक पेश किया गया। निचले सदन में विधेयक पेश करते हुए श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि इसमें श्रम कानूनों की जटिलताओं को कम करने और उससे जुड़ी समस्याओं का समाधान निकालने की पहल की गई है। उन्होंने कहा कि हमने विधेयक लाने से पहले मजदूर संगठनों से गंभीर चर्चा की। गंगवार ने कहा कि इसके तहत 44 कानूनों को चार कानूनों में बदलने की महत्वपूर्ण पहल की गई है।
लोकसभा में पेश इस विधेयक में कहा गया है कि प्रस्तावित विधान अर्थात सामाजिक सुरक्षा संहिता 2019 प्रौद्योगिकी के उपयोग को आसान बनायेगी और पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करेगा। विधेयक में कहा गया है कि नियम अवधि कर्मचारियों के फायदों का परिमाण व्यापक होगा और श्रम विधियों का अनुपालन करना सुगम होगा जो समानता की ओर एक बड़ा कदम होगा। यह अधिक उद्यमों की स्थापना को बढ़ावा देगा जिससे रोजगार के अवसरों का सृजन होगा। इसमें कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी पेंशन योजना, कर्मचारी जमा संबंधित बीमा योजना का बीस या अधिक कर्मचारियों को नियोजित करने वाले औद्योगिक स्थापनों तक विस्तार करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य कर्मचारी भविष्य निधि के कर्मचारियों के किसी वर्ग के लिये कर्मचारी योगदान की विभिन्न दरों को स्पष्ट करने का उपबंध करना है जो केंद्र सरकार निर्दिष्ट अवधि के लिये अधिसूचित करे। इसका मकसद यह उपबंध करना है कि नियोक्ता की कर्मचारियों को कर्मचारी राज्य बीमा निगम के पास रजिस्टर करने या कर्मचारी राज्य बीमा निगम द्वारा कर्मचारी को फायदा जारी करने में असफलता की दशा में ऐसे फायदों को नियोक्ता से वसूल किया जायेगा ।
माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के हित में विधेयक
लोकसभा में बुधवार को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण एवं कल्यण संशोधन विधेयक पेश किया गया जिसमें वरिष्ठ नागरिकों के लिए गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने एवं उनके साथ दुव्र्यवहार करने पर कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने निचने सदन में उक्त विधेयक पेश किया। विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि इससे संबंधित अधिनियम पर विचार करने के बाद सचिवों के समूह ने एक समान आयु के वरिष्ठ नागरिकों को सभी फायदा देने, वरिष्ठ नागरिकों के लिये भरण पोषण की रकम में वृद्धि करने और गृह देखरेख सेवाओं के मानकीकरण की सिफारिश की है। इसके अंतर्गत पुत्रवधू और दामाद को बालक की परिभाषा की परिधि में लाने की बात भी कही गई है। इसका मकसद माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों द्वारा भरण पोषण के लिये आवेदन प्रस्तुत किये जाने में वृद्धि करना, अस्सी वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के आवेदनों सहित भरण पोषण आवेदनों का शीघ्र निपटान का उपबंध करना है। इसमें मासिक भरण पोषण की 10 हजार रूपये की ऊपरी सीमा को हटाने की बात कही गई है। इसके तहत प्रत्येक जिले में वरिष्ठ नागरिकों के लिये विशेष पुलिस यूनिट का गठन करने तथा प्रत्येक थाने में वरिष्ठ नागरिकों के लिये शीर्ष अधिकारी नियुक्त करने तथा वरिष्ठ नागरिक हेल्पलाइन रखने की बात कही गई है।
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने उक्त विधेयक पेश किया। इसमें संस्कृत में शिक्षण और अनुसंधान के लिए, संस्कृत संवद्र्धन से जुड़े क्रियाकलापों के विकास के लिए विश्वविद्यालयों की स्थापना और नियमन के लिए तथा उससे संबंधित विषयों का उपबंध किया गया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले सप्ताह केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक को मंजूरी दी थी। इसके तहत संस्कृत के तीन डीम्ड विश्वविद्यालयों को केंद्रीय विश्वविद्यालयों में परिवर्तित करने का प्रस्ताव है। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कैबिनेट की मंजूरी के बाद कहा था कि संस्कृत के लिये पहली बार केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाया जा रहा है जो कि एक अच्छी पहल है।
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