May 13, 2021

बाढ़ के संकट से निपटने के लिए इस्तेमाल संसाधन की बचत होगी: मंत्री गडकरी

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नई दिल्ली । केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र में बाढ़ के संकट से निपटने के स्थायी समाधान हेतु स्टेट वाटर ग्रिड के निर्माण के लिए महाराष्ट्र सरकार से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का अनुरोध किया है। यह प्रयास सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सरकार के लिए मददगार सिद्ध होगा। साथ ही बाढ़ के संकट से निपटने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले संसाधन की बचत होगी। 14 अक्टूबर, 2020 को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके कैबिनेट सहयोगियों तथा संसद सदस्य शरद पवार को लिखे इस पत्र में उन्होंने इस मामले पर जल्द निर्णय लेने के लिए राज्य सरकार से अनुरोध किया है ताकि इस पर क्रियान्वयन यथाशीघ्र शुरू हो सके।
मंत्री गडकरी ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का ध्यान महाराष्ट्र में प्रतिवर्ष बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में बड़े पैमाने पर जान और माल के नुकसान जैसे गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के चलते राज्य के विभिन्न भागों में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, इसलिए इस प्राकृतिक आपदा के बेहतर प्रबंधन के लिए तत्काल कारगर योजना तैयार करने की आवश्यकता है।
यह प्राकृतिक आपदा मानव निर्मित विभिन्न विसंगतियों के चलते अधिक भयावह होती जा रही है। केंद्रीय मंत्री ने महाराष्ट्र सरकार को राष्ट्रीय विद्युतीकरण ग्रिड और राजमार्ग ग्रिड की तर्ज पर राज्य में वाटर ग्रिड की महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू करने का सुझाव दिया है। इसका उद्देश्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की नदियों का पानी राज्य के सूखाग्रस्त क्षेत्रों की तरफ मोड़ना है। इससे सूखा प्रभावित या कम वर्षा वाले क्षेत्रों में जल संकट कम होने से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही इससे असिंचित क्षेत्रों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी जिससे किसानों की आत्महत्याओं के मामलों में व्यापक कमी आएगी। उन्होंने लिखा है अपने पत्र में कि विभिन्न अध्ययन यह दर्शाते हैं कि जिन भागों में 55 प्रतिशत से ज्यादा क्षेत्र सिंचाई के दायरे में आते हैं वहां आत्महत्या के मामलों में कमी आई है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था से कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी होगी और ग्रामीण तथा राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। अतिरिक्त जल का प्रवाह मोड़ने से स्थानीय संसाधनों पर दबाव कम होगा। इससे नजदीक भविष्य में नदियों के रास्ते जल परिवहन का विकल्प विकसित किया जा सकता है जो यात्रियों और वस्तुओं के आवागमन का वैकल्पिक मार्ग हो सकेगा। उन्होंने लिखा कि अगर ऐसी परियोजनाओं को प्राथमिकता के तौर पर विकसित किया जाता है तो मछली पालन के साथ-साथ अन्य व्यवसाय विकसित हो सकते हैं और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित हो सकते हैं।

 

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